तीन से अधिक संतान होने पर होगी सेवा समाप्त 26 जनवरी 2001 के बाद किसी भी कर्मचारी की तीन से अधिक संतान होने पर सेवा समाप्त

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तीन से अधिक संतान होने पर होगी सेवा समाप्त 26 जनवरी 2001 के बाद किसी भी कर्मचारी की तीन से अधिक संतान होने पर सेवा समाप्त

जिले में ऐसे कई कर्मचारी मोजुद अब उन पर भी लटक रही तलवार जाने पुरी खबर।

मध्य प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू है। इसके तहत 26 जनवरी 2001 के बाद यदि किसी कर्मचारी को तीसरी संतान होती है। तो उसकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे उम्मीदवार जिन्होंने सभी प्रकार की परीक्षा पास करके अपनी प्रमाणित कर दी है। यदि तीन संतानों के माता- पिता हैं तो नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे। यह नियम सिविल सेवा (सेवाओं की सामान्य स्थिति) के साथ ही यह नियम उच्चतर न्यायिक सेवाओं पर भी लागू होता है।

मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग में नौकरी करने वाली एक शिक्षिका को नौकरी से इसलिए बाहर कर दिया गया क्योंकि उसके तीन बच्चे थे। शिक्षिका ने अब इंदौर हाईकोर्ट में याचिका लगाई है, जिसमें उन्हें नौकरी पर वापस रखने की गुहार की गई है वहीं अगर नियम को देखा जाए तो अभी भी शिक्षा विभाग में दो दर्जन से ज्यादा ऐसे शिक्षक हैं। जिनकी तीन या उससे अधिक संतान है. ऐसे में मजेदार बात यह है कि अब अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में इन दिनों नई कवायद चल पड़ी है. दरअसल उन मां-बाप को विभाग खोज रहा है जो इस वक्त सरकारी नौकरी कर रहे हैं. जिनके 3 या 3 से अधिक संतान हैं अब यह बात उठी क्यों है वह भी आपको बता देते हैं दरअसल मध्य प्रदेश के अगर जिले का है जहां पदस्थ शिक्षिका रहमत बानो मंसूरी शासकीय माध्यमिक विद्यालय बीजा नगरी में माध्यमिक शिक्षिका के तौर पर पदस्थ थी जो इन दिनों चर्चा में है रहमत बानो मंसूरी को तीन संतान होने पर बीते 7 जून 2023 को पद से हटा दिया गया मध्य प्रदेश सिविल सेवा 1961 नियम छह के तहत इन्हें हटाने का कारण बताया गया ।

सुत्रों से मिली जानकारी

विशेष सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब शिक्षकों की सूची अलीराजपुर जिले की भी बन रही हैं। जिनके 3 या उससे अधिक बच्चे हैं। वह भी इस नियम के तहत आते हैं। यह मामला स्कूल शिक्षा विभाग का है । लेकिन इस नियम के तहत कई दूसरे विभागों में भी कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।

यह है नियम

दो से अधिक संतान के संबंध में मप्र शासन सामान्य प्रशासन विभाग भोपाल के परिपत्र 10 मई 2000 द्वारा मप्र सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 6 के उपनियम-4 के उपनियम के तहत तीसरी संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है। इस संबंध में स्पष्ट आदेश है। कोई भी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक जीवित संतान हैं,। जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हो वह किसी सेवा या पद पर नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने माना दो से ज्यादा संतान वाले अपात्र

हाईकोर्ट की बेंच ने 30 जून 2021 के एक मामले डब्लयू – ए 1381/2019 में पारित निर्णय की मानें तो 26 जनवरी 2001 के बाद जिन सरकारी शिक्षकों एवं कर्मचारियों की 2 से ज्यादा संतानें हुई हैं, उन्हें अपात्र कर दिया जाएगा। इस आदेश के बाद सरकारी सेवकों में हड़कंप मच गया था। एक मामले में अपीलार्थी ने म.प्र. शासन के खिलाफ रिट पिटिशन दायर की थी। जिसमें अपीलार्थी ने कहा था, कि नौकरी लगने के विज्ञापन में तीन बच्चों की जानकारी का नहीं लिखा है, इसके लिए उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाए। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में यह कहते हुए अपील को खारिज कर दिया कि सिविल सर्विसेज नियम 2001 पहले बने है। नियम में साफ लिखा है कि शासकीय सेवक के दो से अधिक बच्चे होने को अवाचार माना गया है, यदि उनमें से 1 का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ हो।

कोन से विभाग में है जिले में और ऐसे कर्मचारी

अलीराजपुर सुत्र बताते हैं। ऐसे कहीं कर्मचारी अधिकारीयो की लिस्ट बहुत जल्द मिडिया के समक्ष प्रकाशित के लिए प्रस्तुत की जाएगी जिसमे स्कूल शिक्षा विभाग के अलावा ऐसे और विभाग की जानकारी मोजुद है जिसमें स्वास्थ्य विभाग,महिला बाल विकास विभाग, आय सी डी एस , पंचायत, फोरेस्ट, सहित और भी अन्य विभागों की जानकारी जुटाई गयी है जिसमें कुछ कर्मचारि तो ऐसे भी हैं जिनकी एक से अधिक पत्नी और चार से अधिक बच्चे हैं ऐसे में अब इनपर कार्यवाही करना ये शासन प्रशासन का काम है। 

ऐसी ही दिलचस्प और सटीक खबरों के लिए बने रहे अगली किस्त में उजागर करेंगे नाम

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