30 वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में शामिल होने के लिए जिले से हजारों की संख्या में पहुचेंगे हमीरपुरा

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30 वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में शामिल होने के लिए जिले से हजारों की संख्या में पहुचेंगे हमीरपुरा

 

जिले के सामाजिक कार्यकर्ताओं की हुई बैठक,मध्यप्रदेश के छ:स्थानों से पहुँचेगी यात्राएं अलीराजपुर जिसका होगा भव्य स्वागत

अलीराजपुर:- आदिवासी एकता परिषद का वैचारिक आंदोलन विगत 30 वर्षों से देश व दुनिया में आदिवासी तथा गैर आदिवासी समाज में आदिवासी एकता,अस्मिता,आत्मसम्मान, कला, ज्ञान, संस्कृति, इतिहास, स्वावलंबन,अस्तित्व और प्रकृति सुरक्षा जैसे आदि विषयों को लेकर चलाया जा रहा है । आदिवासी एकता परिषद का ज्यादा कार्य क्षेत्र मध्य पश्चिमी भारत जिसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, दादरा नगर हवेली एवं महाराष्ट्र राज्य में चल रहा है।आदिवासी एकता परिषद द्वारा प्रतिवर्ष 13 -14 -15 जनवरी को राष्ट्रीय स्तर पर *आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन* का आयोजन उक्त राज्यों में चक्रिय क्रम में किया जाता है ।

इस साल का महासम्मेलन 13-14 -15 जनवरी, 2023 को छकतला-रेणदा रोड,हमीरपुरा तहसील कवांट, जिला छोटा उदयपुर (गुजरात) में होने जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर स्थानीय सुरेंद्र उद्यान अलीराजपुर में जिले के वरिष्ठ कार्यक्रताओं झेतरा भाई छोटी फाटा भाबरा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।सभी के सुझाव एवं निर्णय अनुसार विस्तृत कार्य योजना तैयार की गई है,जिले से भी हजारों की संख्या में आदिवासी समाज जन पहुचेंगे।

आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा विंग केरम जमरा ने कहा कि महासम्मेलन में उक्त पांच राज्यों के अलावा भारत देश के प्रायः प्रायः सभी राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ में आदिवासियों के मुद्दों को लेकर बने परमानेंट फोरम के सदस्य तथा अन्य देशों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।

आदिवासी एकता परिषद के भंगुसिंह तोमर ने कहा कि यह महासम्मेलन आदिवासी समाज का एक अनोखा विहंगम समागम होता है ,जहां पर देशभर के अलग-अलग इलाकों के कार्यकर्ता अपनी अपनी परंपरा, वेशभूषा, वाद्य यंत्रों के साथ ही खाद्य पदार्थ, साज सज्जा का सामान लेकर शामिल होते हैं और 3 दिन तक आदिवासियों के बारे में अलग-अलग विषयों पर गहन चिंतन मंथन किया जाता है । कार्यक्रमों की भी विविधता होती है आदिवासी सांस्कृतिक एकता महारैली, आदिवासी प्रदर्शनी, युवा सम्मेलन, महिला सम्मेलन, साहित्य सम्मेलन, गीत संगीत सम्मेलन, मुख्य कार्यक्रम और संगठन सत्र आदि इन सबकी तैयारी पूरे वर्ष भर चलती रहती है ।

आयोजन समिति के वालसिंह भाई राठवा छोटा उदयपुर ने कहा कि आदिवासी एकता परिषद कोई संगठन नहीं है, बल्कि आदिवासियत को बचाने के लिए चलाया जाने वाला एक वैचारिक आंदोलन है।यह मानव एवं प्रकृति के अस्तित्व को बचाने के लिए सोच बदलने का कार्य निरंतर कर रहा है।

रतनसिंह रावत ने कहा कि आदिवासी एकता परिषद के साथ देश के अलग-अलग इलाके में काम करने वाले आदिवासी समाज सैकड़ों संगठन व संस्थाएं जुड़े हुए हैं जो साल भर अपने अपने इलाके में कार्य करते हैं और साल में एक बार 13 -14 -15 जनवरी को सभी कार्यकर्ता आपस में मिलते हैं।

नवल सिंह मंडलोई नानपुर ने कहा कि आज यह सम्मेलन आदिवासी समाज का एक जुनून बन चुका है।सारे कार्यकर्ता साल भर इसका इंतजार करते हैं और इस समय अपने इलाके में कोई भी कार्यक्रम नहीं रखते हैं और कोशिश करते हैं कि इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने ।

अरविंद कनेश ने कहा कि इस महासम्मेलन में शामिल होने हेतु देश के अलग-अलग इलाकों से “आदिवासियत बचाओं यात्रा” का आयोजन भी किया जाता है । इसी कड़ी में मध्य प्रदेश राज्य के 6 अलग अलग स्थानों से “आदिवासियत बचाओं यात्रा” का आयोजन किया जा रहा है । जिसमें पहली यात्रा भंवरगढ़ (बिजासन) जिला बड़वानी, दूसरी यात्रा महादेव सिरवेल जिला खरगोन, तीसरी यात्रा बड़ौदा अहीर जिला खंडवा, चौथी यात्रा बागली जिला देवास, पांचवी यात्रा सातरुंडा जिला रतलाम एवं छठवीं यात्रा सैलाना जिला रतलाम से प्रारंभ होगी । यह यात्रा वाहन रैली के रूप में चलेगी और गांव में पैदल चलेंगे।जब यह यात्रा गांव में पहुंचेगी तब वहां के कार्यकर्ता यात्रा का स्वागत करेंगे और सभा का आयोजन करके यात्रा का संदेश सुनेंगे तथा गांव के लोगों की जिम्मेदारी होगी वह यात्रा को अगले गांव तक छोड़ें, यह क्रम महासम्मेलन स्थल पहुंचने तक चलता रहेगा। अलीराजपुर में यात्रा का भव्य स्वागत किया जावेगा। इस तरह से इलाके के लाखों लोगों को अपना संदेश देते हुए आएंगे।इस यात्रा का कोई स्पेशल संयोजक या प्रायोजक नहीं होता है, लोगों के सहयोग से एवं लोगों द्वारा ही किया जाएगा । रास्ते में मिलने वाले लोग ₹1 से लेकर उनकी क्षमता अनुसार सहयोग करते हैं, गाड़ियों का डीजल डलवाते हैं और रास्ते में भोजन तथा रुकने की व्यवस्था भी करते हैं । इस ऐतिहासिक यात्रा को सफल बनाने में कार्यकर्ता लोग ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाएं और पूरे अनुशासन के साथ इसे सफल बनायेंगे ऐसा विश्वास हम सबको है । यात्रा आयोजित करने का निर्णय मध्यप्रदेश के मालवा निमाड़ में कार्यरत आदिवासी समाज के सामाजिक संगठनों के सक्रिय कार्यकर्ताओं द्वारा लिया गया है।

बैठक में निर्णय लिया गया है कि जिले के सभी ब्लाकों में बैठक आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों को कार्यक्रम में पहुचने के लिए प्रेरित किया जावेगा।

इस अवसर पर वीरेंद्र सिंह बघेल जोबट,अर्जुन सिंगड, उदयगढ़ कॉमेडी भीकू चोहान, बहादुर सिंह रावत सोण्डवा, बंसन्त अजनार भाबरा,शंकर मुजाल्दा आम्बुआ, राकेश गाड़रिया,हरिश बघेल बोरी, लाल सिंह डावर जोबट, केरमसिंह चौहान, सुरेश टिटौले,भिकला चोहान, गुलाबी तोमर, अन्नू चौहान आदि उपस्थिति होकर बात रखी गई है।कार्यक्रम का संचालन विक्रमसिंह चौहान ने किया एवं आभार मालसिंह तोमर ने माना।

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