मुख्यमंत्री निकाह योजना में निकाह पढ़ाने को लेकर हुआ विवाद, खुद अल्पसंख्यक जिला उपाध्यक्ष ने ली आपत्ती कथनी और करनी में फर्क

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मुख्यमंत्री निकाह योजना में निकाह पढ़ाने को लेकर हुआ विवाद, खुद अल्पसंख्यक जिला उपाध्यक्ष ने ली आपत्ती कथनी और करनी में फर्क

निकाह कलमा पढ़ाते हुए रमीज बाबा

बाईट- काशीम मंसूरी 

 

वो कोई मजबुरो लाचार नहीं हो सकता।

वक्त जैसा कोई खुद्दार नहीं हो सकता।

सिर्फ झुब्बा और दस्तार पहन लेने से।

आदमी साहिबे किरदार नहीं हो सकता।।  

अलीराजपुर 19 मार्च रविवार को मुख्यमंत्री निकाह योजना में निकाह पढ़ाने को लेकर विवाद तब हुआ जब सुन्नी और तब्लीगी को लेकर अल्पसंख्यक जिला उपाध्यक्ष सुफी रमीज बाबा ने तब्लीगी जमात के 3 जोड़ों के निकाह को लेकर आपत्ती ली जबकि ये निकाह सिया सुन्नी नहीं बल्कि शासकीय योजना मे सामिल था जिसका विरोध खुद पार्टी के कार्यकर्ता खुद कर रहे थे जो मुस्लिम समाज में चर्चा का विषय बना रहा।

मुस्लिम समाज में बना चर्चा का विषय

अब समझने की बात तो तब हुई जब खूद विरोध कर रहे सूफी बाबा ने किसी को निकाह नहीं पढ़ाने दिया और फिर आखिर में विवाद और तनाव बडने के बाद जब सभी सुन्नी ओलमा विवाद को बढ़ता देख स्टेज से चले गये।

आखिर ये ढोंग क्यों रचा गया।

जब पार्टी के ही लोगों ने सुफी बाबा पर प्रेशर बनाया जिस के बाद इमान को ताक में रखकर सुन्नीयत का चोला उतार कर खुद सूफी बाबा ने निकाह कलमा पढ़ाया सुन्नियत का दम भरने वाले सूफी बाबा ने ये ढोंग क्यों रचा ये समझ के परे है जब विरोध किया था तो अपनी बात पर अडे रहना था निकाह या कलमा पढ़ाकर अपनी जबान से फिर जाना ये ढोंग नहीं तो क्या है। यदि आपको आपत्ती थी तो फिर निकाह पढ़ाने का विरोध किया ही क्यों इस तरह की दोहरी नीति अपना कर समाज में फुट डालने का काम किया जा रहा है समाज में ना इत्तेफाकी फैलाकर क्या साबित करना चाह रहे हैं दिन भर जन चौराहों पर चर्चा बनी रही की ऐसे व्यक्ति की जामा मस्जिद के चुनाव में हार होना अल्लाह के तरफ से ही थी यदि ऐसा व्यक्ति समाज की इतनी बड़ी मस्जिद का नेतृत्व करने व समाज के हक में फैसले लेने के काबिल नहीं हो सकता और भाजपा द्वारा अल्पसंख्यक जिला उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी में जोड़ने का नहीं बल्कि मुस्लिमो को पार्टी से तोड़ने का काम कर रहे हैं जब की प्रदेश के मुख्यमंत्री सभी को एक नजर से देख रहे हैं फिर पार्टी के ही जिला उपाध्यक्ष सिया सुन्नी में भेदभाव क्यों कर रहे हैं अगर सिया सुन्नी करना है तो दिन की तब्लीगी करो या फिर राजनिति करो कोई भी एक काम करलो दिखावा या ढोंग नहीं , क्या कारण है कि पार्टी के ही पदाधिकारी दोहरा रवैया अपना रहे हैं ये समझ के परे है।

अल्पसंख्यक के उपाध्यक्ष पद पर क्यों है विराजमान

अपने आप को सूफी व हाफ़िज बताने वाले रमीज़ बाबा अल्पसंख्यक जिला उपाध्यक्ष के पद पर क्या इसलिए हे कि किसी अल्पसंख्यक को परेसान करे। बात अगर सुन्नी या तब्लीगी की थी तो रजिस्ट्रेशन के वक्त सभी से फिरके का भी प्रमाणपत्र लिया जाना था। अब एन वक्त पर निकाह नही करवाना यह न केवल आयोजक बल्कि प्रशासन पर भी सवाल उठता है कि आखिर ये सब ढोंग क्यों रचा गया जब रजिस्ट्रेशन के वक्त पता चल गया था की तीन जोड़े तब्लीगी जमात से है तो आपको पहले ही तब्लीगी जमात के उल्मा का इन्तेजाम करना था ये आयोजक की जिम्मेदारी थी आप अपनी कमियां किसी और पर ढोलने की कोशिश कर रहे हो।

नगर में चंदा वसूली की भी है चर्चा

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निकाह योजना को लेकर नगर में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि सम्मेल के नाम पर न्याज करने की बात करके कुछ लोगो द्वारा नगर में चंदा भी किया गया? जिसका कोई प्रमाण या रसीद तो नही पर मौखिक रूप से कुछ लोगो द्वारा यह नगर मेें चर्चा चल रही है किंतु सवाल यह उठता है कि जब सम्पूर्ण खर्च सरकार के द्वारा किया जाना था तो ये चंदा वसूली क्यों कि गयी।

जल्सा कमेटी व गुलशने आबाद कमेटी ने किए कहीं बड़े सम्मेलन

अलीराजपुर नगर की सबसे बड़ी कमेटी जलसा कमेटी ने नगर में जामा मस्जिद चौक पर कहीं बार बड़े निकाह सम्मेलन किये जिसमें सुचारु रुप से 12 जोड़ों का निकाह एक साथ एक ही स्टेज पर बिठाकर किये जिसमें बेटियों को कहीं उपहार दिऐ वो भी बेस्ट कोलेटी का सामान दिया गया।

वाह अल्पसंख्यक के उपाध्यक्ष मौज करदी सबका साथ सब का विकाश नही चाहते

अल्पसंख्यक के उपाध्यक्ष नही चाहते सबका साथ हो सबका विकास हो,ये समाज को अलग अलग करने में लगे हुए है। जिसका उदाहरण आप सभी ने सम्मेलन में देख लिया है। किस तरह की सोच लेकर काम किया। माननीय मुख्यमंत्री ने ये नही किया किसी के साथ भेद भाव करो सभी एक समान है। पर यहाँ कुछ अलग माजरा दिखाई दिया। या फिर बड़े बनने के लिये दिखवा कर दिया। निकह नही पढ़ाने की नगर में जोर सोर से चर्चा चल रही इस तरह की घटना से समाज के लगो आहत हैं।

क्या कहा प्रभारी शहर काजी ने

अल्पसंख्यक जिला उपाध्यक्ष को पार्टी ने मान्य मुख्यमंत्री जी की योजना का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी दी थी या भेद भाव पुर्ण तरीके से काम करने की जिम्मेदारी दी थी , जबकी निकाह की मान्यता है वो दफ्तर दारुल कजात की है जब शहर काजी को कोई आपत्ती नही है निकाह पढ़ाने में तो ये ढोंगी रमीज कोन होता है निकाह पढ़ाने व न पढ़ाने की आपत्ती लेने वाला जब की वहां शहर काजी और नायब काजी दोनों मोजुद थे।

प्रभारी शहर काजी- सैयद हनीफ कादरी चिश्ती

क्या बोले नगर पालिका उपाध्यक्ष

देखिए पहले तो इस कार्यक्रम का उद्देश्य निकाह के माध्यम से सीधे लाभ पहुंचाने का है मान्य मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा निकाह योजना का लाभ दिलाना आयोजक कमेटी का उद्देश्य होना था मगर अल्पसंख्यक उपाध्यक्ष ने सिया सुन्नी का जो ढोंग रचकर आए हुए मेहमानों के साथ बदसुलूकी की है उसकी हम निंदा करते हैं क्योंकि ये लोग अपने दायित्व से भटक कर काम कर रहे थे पार्टी को ऐसे लोगों पर एक्शन लेना चाहिए।

साबीर बाबा नगर पालिका उपाध्यक्ष अलीराजपुर

 

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