शिक्षा विभाग की लापरवाही से उर्दू भाषा का भविष्य खतरे में है – मौलाना उमर कासमी

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शिक्षा विभाग की लापरवाही से उर्दू भाषा का भविष्य खतरे में है – मौलाना उमर कासमी

खरगोन शहर में उर्दू स्कूलो के अंदर चल रही लापरवाही को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव मोलाना उमर कासमी ने खरगोन कलेक्टर को पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि उर्दू शालाओं में हिंदी विषय के शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं जबकि उर्दू माध्यम की शालाओं में हिंदी माध्यम के शिक्षकों का स्थानांतरण और पढ़ाना नियम के विरुद्ध है ये कारनामा किया है खरगोन विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री कुशवाहा ने जबकि मध्य प्रदेश शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग मंत्रालय भोपाल के पत्र क्रमांक/आर-3883/2019/1/25 दिनांक 20/12/2019 ने आयुक्त महोदय को पूर्व में आदेश भी किए थे के नियमों के विरुद्ध स्थानांतरण करने वाले खरगोन सहायक आयुक्त श्री जी एस डामोर और विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री कुशवाहा को निलंबित करने का आदेश दिया था लेकिन मंत्रालय के आदेश को भी इन्होंने हवा में उड़ा दिया आप उर्दू स्कूलों के हाल का इस बात से भी अंदाजा लगा सकते हैं कि पिछले दो सालों से बच्चों को उर्दू स्कूलों में उर्दू विषय की पुस्तकें ही नहीं मिली है जब किताबे ही नहीं है तो बच्चे पढ़ेंगे किया और जब हमने जिला शिक्षा अधिकारी से इस बारे पूछा तो उन्होनें कहा कि किताबे सभी स्कूलों में मिल गई है इतना बड़ा झूठ और जब स्कूलो के शिक्षक और बच्चों और जिले के उर्दू प्रभारी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों से किसी उर्दू स्कूलों में किताबे नहीं बाटी गई है इस तरह ये सभी मिलकर उर्दू भाषा को समाप्त करने मे लगे हुए हैं और विभाग मोन है शहर में ये चर्चा भी आम है कि विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री कुशवाहा कई वर्षों से एक ही विभाग में जमे हुए है और इनके द्वारा खूब माल कमाया जा रहा है इसी के चलते इनके द्वारा उर्दू स्कुलो को हिंदी में संचालित करवाया जा रहा है जो की नियमो के विरुद्ध है इससे पूर्व भी इनकी कई बार शिकायते की गई परन्तु आज तक इनपर कोई कार्यवाही नहीं हुई है विभाग इनपर बड़ा मेहरबान है खरगोन शहर के उर्दू माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 06 शहर की सबसे पुरानी शाला हैं जो की 1932 से उर्दू में संचालित हो रही शाला थी जिसको इनकी निगरानी में 2017-18 में बगेर किसी वरिष्ठ अधिकारी के आदेश के वहा के एक शिक्षक ने हिंदी में कर दिया यह सब इनकी निगरानी में और इनकी शह पर हुआ जबकि यह स्कूल शुरु से उर्दू माध्यम में संचालित हो रही थी जेसा के स्कूल के नाम से ही पता चलता है इस स्कूल में 3 टीचर पढ़ाने वाले हैं और ये तीनों हिन्दी विषय के हे | इसी प्रकार शहर की एक अन्य स्कुल शासकीय उर्दू माध्यमिक विद्यालय खसखसवाड़ी खरगोन में दो ही टीचर है और वो भी हिन्दी विषय के हे इनके द्वारा भी इस स्कूल को बगैर किसी आदेश के अपनी मन मर्जी से हिंदी में संचालित किया जा रहा है

इसी प्रकार शहर की शासकीय उर्दू माध्यमिक विद्यालय संजय नगर खरगोन में पांच शिक्षक पिछले कई सालों से पदस्थ हैं और इनके द्वारा भी इस स्कूल को बगैर किसी आदेश के अपनी मन मर्जी से हिंदी विषय में संचालित किया जा रहा है इसी तरह अन्य उर्दू स्कूलो को भी इनके द्वारा टीचरों से साठ गाठ कर हिंदी में संचालित करवाया जा रहा है और समस्त उर्दू स्कूलो में हिंदी विषय के टीचर बिठा रखे है जिससे उर्दू भाषा का भविष्य खतरे में पढ़ गया है जब आप इन सभी उर्दू स्कुलो का दोरा करेंगे तो पाएंगे कि हमारे बच्चो को उर्दू पढ़ना लिखना भी नहीं आती है क्युंकी यहाँ सारे शिक्षक हिंदी विषय के बिठा रखे है और इन सभी शिक्षकों को भी उर्दू नहीं आती है जब इस बारे में शहर वासियों ने विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री कुशवाहा से कहा की आप की ड्यूटी और जिम्मेदारी है कि हर एक महीने में आप को स्कुलों का दौरा कर विभाग को बच्चों की पढ़ाई से अवगत कराना चाहिए तो श्री कुशवाहा ने साफ साफ मना कर दिया कि ये मेरा काम नहीं है तो फिर वरिष्ठ अधिकारियों को जनता को बताना होगा कि श्री कुशवाहा का किया काम है इससे पूर्व भी खरगोन शहर वासियों के द्वारा माननीय कलेक्टर महोदय को ज्ञापन के माध्यम से उर्दू स्कुलो के हाल से अवगत कराया जा चूका है परन्तु आज दिनाँक तक कोई कार्यवाही नहीं हुईं है

खरगोन विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री कुशवाह और वह सभी शिक्षक जिन्होंने उर्दू स्कूलों को बगैर किसी आदेश के हिन्दी में संचालित कर रहे हैं उन सभी को तत्काल निलंबित कर इनपर FIR दर्ज की जाए और उर्दू स्कुलो का भविष्य बचाने की मांग की है और उर्दू स्कुलो में कई वर्षो से बेठे हुए हिंदी विषय के टीचरों को अन्यत्र अन्य स्थान पर स्थानांतरण करने की भी मांग की गई है अब देखना ये है कि क्या प्रशासन और विभाग इनपर कार्यवाही करता है या उर्दू भाषा को खत्म करने में श्री कुशवाहा की इसी तरह मदद करता रहेगा ।

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