बिनु सत्संग विवेक न होई….* *कथा के पांचवें दिन श्री राम सीता विवाह प्रसंग में नाचे राम भक्त

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बिनु सत्संग विवेक न होई….कथा के पांचवें दिन श्री राम सीता विवाह प्रसंग में नाचे राम भक्त

आलीराजपुर – सत्संग के बिना ज्ञान जागृत नहीं होता और भगवान की कृपा के बिना सत्संग सुनना भी संभव नहीं है। तात्पर्य यह है कि बिना अच्छी संगति और ईश्वर के प्रति भक्तिभाव रखे बिना कभी भी विवेक हासिल नहीं हो सकता और जिस व्यक्ति का विवेक जागृत नहीं है उसे कभी ईश्वर नहीं मिल पाता। जब तक वह ईश्वर के सानिध्य में नहीं जाएगा तब तक उसका विवेक जागृत नहीं होगा। बिना सत्संग के व्यक्ति के भीतर विवेक (बुद्धि) की उत्पत्ति नहीं होती है तथा बिना राम कृपा के यह संभव नही है। राम कृपा का महात्म्य भी अनंत है। सुख शांति हम खरीद नहीं सकते वह अंदर से आती है ज्ञान सद-विवेक से आता है सबका साथ हो तो विकास आता हैं इसलिए कहते हैं सबका साथ सबका विकास। उक्त विचार श्री राम कथा उत्सव समिति द्वारा आयोजित श्री राम महिमा व्याख्यान कथा में पं.श्री अरुण जी शर्मा (बड़वाह) ने व्यक्त किए। मीडिया संयोजक उमेश वर्मा कछवाहा‌ ने जानकारी देते हुए बताया कि कड़कड़ाती ठंड के बावजूद श्रीराम कथा के अंत तक श्रोता पांडाल में जमे रहे, कथा के पांचवें दिन श्रीराम सीता विवाह प्रसंग हुआ, भगवान राम की बारात में खूब झूमे रामभक्त। , श्रोता बड़ी संख्या में कथा सुनने पहुंचे और कथा का आनंद लिया। कथा के पांचवे दिन कथा स्थल रणछोड़ राय मंदिर प्रांगण में श्रीराम और सीता विवाह धूम धाम से मनाया गया। इस अवसर पर एमजी रोड से ढोल ढमाके के साथ भगवान राम की बारात में निकली जो कथा प्रांगण में पहुंची। बारात में शामिल महिला पुरुष और युवा नाचते गाते जय श्रीराम के जयकारे लगाते हुए कथा पांडाल तक आए। इसके बाद श्रीराम सीता विवाह सम्पन्न हुआ। विवाह प्रसंग कथा वाचक पंडित अरुण शर्मा द्वारा संपन्न कराया गया। पंडित श्री शर्मा ने कथा में बताया कि बच्चे के जन्म के समय नाल छेदन नहीं होती है तब तक सूतक नहीं लगता हैं इसलिए दान कर सकते हैं जैसे राजा दशरथ ने किया था और अंतिम सांस चल रही है इसके पहले भी दान करने से उसका अनंत फल मिलता है। राम भगवान के जन्म के समय भगवान की छवि निहारने के लिए सूर्य भगवान एक माह तक रुक गए और द्वापर युग में रासलीला में चंद्र भगवान भी एक माह तक रुक रहे।गणेश जी विवेक के देवता है और सिद्धि और बुद्धि उनकी धर्मपत्नी है। मति सुधरेगी तो स्वर्ग और बिगड़ी तो नरक मिलेगा। सत्संग में जाने से मति सुधरेगी । आनंद सुख प्राप्त करना चाहते हो तो गुरु को प्रसन्न करो। अभी भेड़ बकरी की चाल चल रही हैं, भीड़ की पूजा हो रही है। जहां भीड़ लगी वही सिद्ध स्थल है बाकी नहीं हैं जबकि ऐसा नहीं हैं भगवान को प्रेम भाव से, भजन संकीर्तन से पूजते हैं ।भगवान वहां प्रकट हो जाते है। रक्त रक्त में राम है। हम चार व्यक्तियों में हैरान हो गए जबकि भगवान 14 लोकों को चलाता है हमें जिंदा रखने के लिए भोजन पानी आदि का ख्याल भगवान रखते हैं। भगवान इतना चाहते हैं कि तुम मेरा सुमिरन कर बस । हम अपने को भक्त माने, भगवान मिल गया तो जैसे समुद्र में एक लोटा जल डालते ही समुद्र बन जाता है वैसे ही हम भगवान में मिल गए तो हम भी भगवान के हो गए। कथा में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य किशोर शाह,हिंदू युवा जनजाति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप चौहान,विहिप जिला अध्यक्ष गणपतलाल गुप्ता,राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नगर कार्यवाह सयम गुप्ता भी पहुंचे और कथा का श्रवण किया। श्रीराम कथा उत्सव समिति के पदाधिकारियों द्वारा यजमान परिवार धनराज कन्हैयालाल गुप्ता रेडियो,भावेश बिश्या और कथा श्रवण करने आए विशेष लोगो का स्वागत किया गया। कथा के पांचवे दिन की आरती दशा वैष्णव पोरवाड़ समाज,जैन समाज और असाडा राजपूत समाज द्वारा आरती की गई।

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